Sunday, September 30, 2012
150 महिलाओं से ठगी
भारत में अधिकतर बुजुर्ग अपने बेटों की गालियां झेलते हैं
Monday, August 13, 2012
किसी भी चीज की अति बुरी होती है
मानवतावादी और उनका मानवधर्म
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मनुष्य का मूल स्वभाव धार्मिक होता है| कोई भी मनुष्य धर्म से पृथक होकर नहीं रह सकता| मनुष्य के अन्दर आत्मा का वास होता है जो की परमात्मा का अंश होती है| फिर मनुष्य धर्म और ईश्वर से अलग कैसे हो सकता है| मनुष्य का मूल अध्यात्म है और रहेगा| इस दुनिया की कोई भी चीज चाहे वो सजीव हो या निर्जीव, अपनी प्रकृति के विपरीत आचरण करके ज्यादा दिनों तक अपना अस्तित्व कायम नहीं रख सकती| जो मनुष्य अपनी मूल प्रकृति के विपरीत आचरण शुरू कर देते हैं उनका अंत हो जाता है| ये अंत भौतिक नहीं बल्कि आतंरिक होता है| मनुष्य अपनी काया से तो जीवित दिखता है परन्तु उसकी मानवता मर जाती है| वो पशु से भी बदतर हो जाता है|
मानवता के नाम पर चलनेवाले गोरखधंधे में सब कुछ होता है| दानवता का नंगा नाच देखना हो तो उन लोगों को देखिये जिन्होंने धर्म को त्याग दिया है| ऐसे लोग खुलेआम आधुनिकता की अंधी दौड़ का समर्थन करते मिलेंगे| उनके लिए प्रेम महज एक वासनापूर्ति से ज्यादा कुछ नहीं| शीलता को छोड़ के भौंडेपन का प्रचार भी यही मानवतावादी करते हैं| मर्यादाहीनता को निजी मामला बताना हो अथवा हिंसा के प्रति दोहरा रवैया, सब इन्हीं कथित मानवतावादियों की देन है| नशीली वस्तुओं यथा शराब, ड्रग्स आदि इनके लिए मनोरंजन के साधन मात्र हैं| दूसरों को स्वार्थ से दूर रहने की शिक्षा देने वाले ये लोग स्वार्थ में आकंठ डूबे रहते हैं| आज अगर छीनने की भावना बढ़ी है तो इसका कारण यही मानवतावादी हैं जो अपनेआप को सफलता के उस शिखर पर देखना चाहते हैं जहाँ कोई और न पहुंचा हो|
धर्म तो जीवन है| शाश्वत है, सत्य है| इसको नकारना अपनी अल्पबुद्धि का परिचय देने से अधिक और कुछ भी नहीं है| कोई स्वयं को ही नकारे तो इसे और क्या कहा जायेगा| संसार में आज अगर अपराध है तो उसका कारण लोभ है, वासना है| दुनिया में जो सिर्फ एक आगे निकलने की भावना बढ़ी है उसका कारण मनुष्य की अनंत इच्छाएं हैं| मनुष्य आज स्वयं पर नियंत्रण नहीं रख पा रहा है तो इसकी एकमात्र वजह मनुष्य का धर्म से दूर होना है| अपने मन पर नियंत्रण अत्यंत जरूरी है| मानव और दानव में यही अंतर होता है| दानव अपने मन का गुलाम हो उसके अधीन हो जाता है और मानव अपने मन को अपने अधीन रखता है| अब ये निर्णय तो मानव को ही करना होगा की वो मानव बनना चाहता है या दानव| इमोशनल अत्याचार है घातक साल भर पहले एक फिल्म आई थी -प्यार का पंचनामा। इसके एक दृश्य में नायक अपने ऑफिस के टॉयलेट में छिपकर किसी दूसरी कंपनी के लिए टेलीफोनिक इंटरव्यू दे रहा था। इसी बीच उसकी गर्लफ्रेंड ने बार-बार फोन करके उसे परेशान कर दिया। जब लडके ने उसका कॉल रिसीव किया तो उधर से आवाज आई, फिनायल पीने से कुछ होता तो नहीं? लडके ने घबराकर पूछा, तुम ऐसी बातें क्यों कर रही हो?, वो मैंने फिनायल..। यह सुनते ही लडका इंटरव्यू अधूरा छोड कर उसे बचाने जाता है। लडके को देखकर वह बडी मासूमियत सेकहती है, सो स्वीट ऑफ यू, तुम आ गए। सॉरी जानू..मैं तो सिर्फ यह देखना चाहती थी कि तुम्हें मेरी फिक्र है या नहीं? यह सुनने के बाद लडके की क्या प्रतिक्रिया रही होगी, इसका अंदाजा तो आप लगा ही सकते हैं।
क्यों होता है ऐसा यह तो बात हुई फिल्म की, लेकिन हमारी जिंदगी भी फिल्मों से ज्यादा अलग नहीं होती। हमारे आसपास कई ऐसे लोग मौजूद होते हैं, जो दूसरों पर इमोशनल अत्याचार करने में माहिर होते हैं। मनोविज्ञान की भाषा में ऐसे लोगों को इमोशनल पैरासाइट या इमोशनल वैंपाइर कहा जाता है। इन्हें रोने के लिए हमेशा किसी कंधे की तलाश रहती है। यह एक तरह का मेंटल मेकैनिज्म है। असुरक्षा की भावना से ग्रस्त ऐसे लोग किसी भी रिश्ते में ऐसा व्यवहार करते हैं। इस संबंध में मनोवैज्ञानिक सलाहकार डॉ. भागरानी कालरा कहती हैं, बचपन में माता-पिता का अतिशय संरक्षण या प्यार की कमी। दोनों ही स्थितियां बच्चे के व्यक्तित्व को कमजोर बनाती हैं। बाद में ऐसे लोगों का आत्मविश्वास इतना कमजोर पड जाता है कि ये अपने हर काम में दूसरों की मदद लेने के आदी हो जाते हैं, लेकिन इनमें जिम्मेदारी की भावना जरा भी नहीं होती।
कैसे करें पहचान 1. अपनों को पर्सनल स्पेस न देना 2. मतलब निकल जाने पर पल्ला झाड लेना 3. अपनी बातों से करीबी लोगों के मन में अपराध बोध की भावना को उकसाना 4. आत्मकेंद्रित होना 5. अपनी परेशानियों को दूसरों के सामने बढा-चढाकर पेश करना 6. हमेशा सहानुभूति की इच्छा रखना 7. अपनी किसी भी नाकामी के लिए दूसरों को दोषी ठहराना 8. हमेशा यह शिकायत करना कि कोई मुझे समझने की कोशिश नहीं करता।
अनजाने में होता है ऐसा ऐसी समस्या से ग्रस्त लोग अपने व्यवहार से अनजान होते हैं, उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं होता कि उनके ऐसे रवैये से दूसरों को कितनी परेशानी होती है। किसी भी रिश्ते में ये दूसरों से बहुत कुछ हासिल करना चाहते हैं, पर ख्ाुद कुछ भी देने को तैयार नहीं होते, लेकिन वास्तव में इन्हें अपनों के सहयोग की जरूरत होती है।
संभलकर संभालें इन्हें 1. इन्हें खुद अपना काम करने के लिए प्रेरित करें, ताकि ये आत्मनिर्भर बनें। 2. इनकी बातें ध्यान से सुनें क्योंकि इन्हें अच्छे श्रोता की तलाश रहती है। 3. अगर परिवार में कोई ऐसा सदस्य हो तो सभी को मिलकर उसे इस समस्या से उबारने की कोशिश करनी चाहिए। 4. दांपत्य जीवन में अगर कोई एक व्यक्ति ऐसा हो तो दूसरे पर भी नकारात्मक असर पडता है। समस्या ज्यादा गंभीर रूप धारण कर ले तो पति-पत्नी दोनों को ही काउंसलिंग की जरूरत होती है। 5. अगर ऐसे लोगों के साथ संयत व्यवहार रखा जाए तो इस समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकता है। |
ऊर्जा बढ़ाएं चार स्टेप्स
Tuesday, July 10, 2012
दहेज के लिए हर किसी से रेप का शिकार हुई युवती
व्यवहार य ह युग व्यवहार का है। आप कितने व्यावहारिक हैं, यह उस समय पता चलता है जब आप किसी मुसीबत में हों। मुसीबत यानी किसी सरकारी काम से किसी कार्यालय में जाना पड़ जाए तो आपको नानी-दादी याद आने लगती है। वहीं तो व्यवहार काम आता है। ऎसे स्थानों पर अक्सर टेबल के नीचे से हाथ का व्यवहार रिश्तों में मित्रता के भाव पैदा करता है। दफ्तरों में जिन कर्मचारियों को टेबल के नीचे हाथ के व्यवहार की कला आती है, उनका हाथ कभी खाली नहीं रहता और वे अपने साहबों के सामने टेबल पर शान से बैठ सकते हैं, क्योंकि सामने से साहब के टेबल के नीचे से आए हाथ को बंद करने की क्षमता उनमें होती है। हाथ होते भी नीचे से मिलाने के लिए ही हंै। हमारे लापरवाह किस्म के अधिकारी कभी टेबल के ऊपर से कुछ लेने की गलती करते हैं और फिर पछताते हैं। अब इस "अर्थ" के साथ भी दिक्कत है। यह कब बढ़ जाती है ,पता ही नहीं चलता। आदमी की नौकरी की कमाई जितनी हो उससे कई गुना अर्थप्राप्ति हो जाया करती है। अब वे पूछें कि इतनी दौलत कहां से आई तो बेचारा अफसर क्या जवाब दे? लक्ष्मी किसी से कहकर थोड़े ही आती है। "अर्थ" शब्द में ही कई अर्थ छिपे हुए हैं, जो जितनी कोशिश करे, उतने अर्थ मिल सकते हैं। अर्थ से कई अनर्थ भी हो जाते हैं, पर उससे घबराने की आवश्यकता नहीं। आखिर जो "कुछ" करेगा वही तो गलती करेगा। "अर्थ" के अर्थ को जो गंभीरता से समझेगा उसी से अनर्थ भी होगा। समझदार किस्म के लोग अक्सर यह कहते हैं कि यह जगत नश्वर है। आज तक कोई भी अपने साथ एक कौड़ी नहीं ले जा सका। जब ले जा नहीं सकते तो इकटा करने से क्या फायदा। जीवन का भरोसा भी नहीं। यदि इसका वेलीडिटी पीरियड होता तो उतने टाईम की एफ.डी करवा सकते थे, मगर यह संभव नहीं है। इसलिए मानव को धन संग्रह के लिए कभी लालची नहीं होना चाहिए। यह सैद्धांतिक बात है और हम जानते हैं कि इस तरह की बातें व्यक्ति तभी सोचता है, जब उसे कुछ कर दिखाने का अवसर नहीं मिल पाता। असल बात तो व्यावहारिक होने की है। व्यवहार के बीच कई उत्प्रेरक आ चुके हैं। धन भी उनमें एक है। इसमें व्यवहार का क्या दोष? दहेज के लिए हर किसी से रेप का शिकार हुई युवती भोपाल।। मध्य प्रदेश के सागर जिले में दहेज की मांग पूरी न कर पाने के कारण एक 20 साल की युवती को ससुरालवालों के जुल्म का शिकार होना पड़ा। पिछले तीन साल से महिला को तबेले में जंजीरों से बांध कर रखा गया। इतना ही नहीं, इस दौरान उसके पति, रिश्तेदारों और यहां तक कि पड़ोसियों ने बार-बार उसके साथ बलात्कार किया। युवती पर जुल्म की इंतहा यह थी कि तीन सालों तक उसका रेप किया गया। इस साल मई में 50 हजार रुपये के लिए उसे एक महाजन को बेच दिया गया। सिर्फ इसलिए क्योंकि उसके परिवारवालों के पास दहेज देने के लिए पैसे नहीं थे। युवती एक बार काफी बीमार हो गई, उस वक्त एक पड़ोसी उसे अस्पताल ले गया, लेकिन उसने भी अस्पताल ले जाते समय कथित तौर पर उसका रेप किया। युवती के साथ हुए इस बर्बर व्यवहार का उस समय पता चला, जब उसके एक रिश्तेदार ने सौभाग्य से उसे महाजन के घर पर देख लिया और इस बात की जानकारी उसके परिवारवालों को दी। 1 जुलाई को महिला अपने रिश्तेदारों के साथ राहतगढ़ पुलिस स्टेशन गई और इस अपने ऊपर हुए जुल्म ही यह भयावह कहानी सुनाई। पुलिस अधिकारी एस. पी सागर के अनुसार, महिला की शादी सागर जिले के पराश्री टूंडा गांव के आनंद कुर्मी के साथ पांच साल पहले हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद से ही ससुरालवालों ने दहेज के लिए उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। पीड़िता के किसान पिता रामकिशन ने बताया, 'शादी के समय ससुरालवालों ने एक लाख रुपये की मांग की थी, जो उन्हें दे दिए गए थे। लेकिन वह बार-बार चीजों की मांग करने लगे। उन्होंने कलर टीवी, मोटरसाइकल, ट्रैक्टर के साथ-साथ एक लाख रुपये नकद और मांगे। इसके लिए बार-बार उन्होंने मेरी बेटी के साथ मारपीट की।' रामकिशन ने कहा, जब मेरी बेटी गर्भवती हुई तो सास और परिवार के दूसरे लोगों ने मिलकर जबरन उसका गर्भपात करवा दिया। शादी के दो साल बाद उन लोगों ने कहा कि अब उनकी बेटी वहां नहीं रह सकती।' इसके बाद ससुरालवालों ने उसे तबेले में गाय-भैसों के साथ जंजीर से बांधकर रखा। कुछ दिन बाद उसका पति आनंद कुर्मी उसे पास के एक गांव खुरई में राम सिंह नाम के अपने रिश्तेदार के यहां छोड़ आया। राम सिंह और उसके बेटों नरेंद्र और लोकेंद्र ने युवती को घर में बंद करके रखा और करीब 20 दिन तक उसके साथ रेप किया। इसके बाद राम सिंह ने उसे एक दूसरे गांव महुना के महाजन द्वारका प्रसाद को उसे बेच दिया। यहां भी उसके साथ बार-बार रेप किया गया। इस बीच एक दिन महिला काफी बीमार पड़ गई तो महाजन का पड़ोसी खड़ग सिंह उसे अस्पताल ले गया, लेकिन रास्ते में उसने भी उससे रेप किया। बाद में महाजन के घर लौटते समय महिला को रिश्तेदार ने देख लिया और पहचान लिया। तब जाकर महिला के घरवालों को इसकी जानकारी मिली और किसी तरह उसे वहां से छुड़ाया गया। 28 जून को महिला को छुड़ाकर उसके घर वाले अपने पास ले आए और दो दिन बाद इस मामले की रिपोर्ट पुलिस मे लिखवाई। पुलिस ने महिला के पति, ससुरालवालों, रेप के दूसरे आरोपियों सहित महाजन के खिलाफ केस दर्ज किया है। फिलहाल पुलिस ने तीन आरोपियों जिसमें युवती के साथ अस्पताल ले जाते समय रेप करने का आरोपी खड़ग सिंह भी शामिल है, को गिरफ्तार किया है। |